Jansankhya Vriddhi | जनसंख्या वृद्धि

Jansankhya Vriddhi

जनसंख्या क्या है जनसंख्या बढ़ने के कारण जनसंख्या बढ़ने से होने वाली समस्याएं जनसंख्या नियंत्रण के उपाय। Jansankhya Vriddhi Jansankhya Vriddhi Ke karan Jansankhya Niyantran Ke Upay Jansankhya Visfot Se Hani

Jansankhya Vriddhi

किसी निश्चित क्षेत्र में जीवो की संख्या में होने वाली वृद्धि को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं दुनिया की जनसंख्या 8 करोड़ प्रतिवर्ष ज्ञान 1.1 प्रतिशत की दर से प्रत्येक वर्ष बढ़ती जा रही है सन 1800 में पूरे विश्व की जनसंख्या 1 अरब थी, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग 8 अरब हो चुकी है।
और यह संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

Jansankhya Vriddhi Ke Karan | जनसंख्या वृद्धि के कारण

  • आधुनिक चिकित्सा के द्वारा अधिकतम रोगों का इलाज संभव है जिसके कारण मृत्यु दर में कमी आई और जन्म दर में वृद्धि हुई है।
  • कुछ लोग अंधविश्वास और धार्मिक कुरीतियों के कारण परिवार नियोजन जैसी चीजों को नहीं मानते और परिवार नियोजन उपायों को अपने ईश्वर के विरुद्ध समझते हैं।
  • कई धर्मों की मान्यता है कि बच्चे ईश्वर की देन है और भी जितनी अधिक होंगे उनके भविष्य के लिए अच्छा है।
  • हमारे देश में बहुत सी कुरीतियां और अंधविश्वास हैं जिसमें बाल विवाह भी एक है कम उम्र में विवाह के कारण ज्यादा बच्चे होने की संभावना अधिक होती है।
  • अगर किसी व्यक्ति की प्रथम दो संताने लड़कियां होती हैं तो भी वह लड़के की चाह में और संतान उत्पन्न करते हैं।

Jansankhya Vriddhi Se Hone Wali Samasya | जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याएं

Population

जनसंख्या वृद्धि देश के आर्थिक विकास के हर क्षेत्र में अवरोध उत्पन्न कर रही है। प्राकृतिक संपदा तथा किसी भी देश के संसाधन सीमित होते हैं जनसंख्या वृद्धि के कारण हम सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ रहे हैं जनसंख्या वृद्धि के कारण कई प्रकार समस्याएं उत्पन्न हो रही है।

खाद्य आपूर्ति की समस्या जनसंख्या वृद्धि के कारण हमारे देश में समझ खाद आपूर्ति को समस्या उत्पन्न हो गई है। जनसंख्या की वृद्धि के अनुपात में खाद्यान्नों का उत्पादन कम हो रहा है जिससे लोगों को खाद्य सामग्री कम मात्रा में उपलब्ध हो पा रही है बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं कुपोषण का शिशु के शारीरिक मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

शिक्षा व्यवस्था की समस्या शिक्षण संस्थाएं कम होने से बढ़ती हुई आबादी के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रवेश पाना कठिन हो रहा है विद्यालयों के कमरे फर्नीचर और खेल के मैदान बढ़ती जनसंख्या के लिए पर्याप्त नहीं है उपयुक्त सुविधाएं न होने के कारण बच्चों में शारीरिक विकृति और अस्वास्थ्य था आंखों का कमजोर होना आदि रोग हो जाते हैं।

रोजगार की समस्या जनसंख्या बढ़ने से बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती जा रही है बेरोजगारी के कारण व्यक्तियों में अपराध की प्रवृत्ति निरंतर बढ़ रही है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा समस्या परिवार में अधिक बच्चे होने से मां का स्वास्थ्य खराब हो जाता है जिससे बच्चों की उचित देखभाल न होने से वह बीमार और दुर्बल हो जाते हैं हमारे देश में अस्पतालों की कम संख्या के साथ साथ उन्हें पर्याप्त औषधियां भी उपलब्ध नहीं हो पाती।

आवास की समस्या बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण कितने ही व्यक्तियों को फुटपाथ गंदी वाह अंधेरी झुग्गी झोपड़ियों में रहना पड़ता है गंदे स्थानों पर रहने से अनेक बीमारियां फैलती हैं।

Jansankhya Vriddhi Rokne Ke Upay | जनसंख्या वृद्धि रोकने के उपाय

Parivar Niyojan

कानून व्यवस्था थाईलैंड, चीन, स्विट्जरलैंड, फिलीपींस आदि देशों की तरह हमारे देश में भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए संविधान में कठोर कानून व्यवस्था होनी चाहिए।
संविधान के 42 वें संशोधन सन 1976 में संसद और विधानसभाओं को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने के अधिकार प्रदत्त किए गए समय की मांग है कि राज्य सरकारी परिवारों को सीमित रखने संबंधी कानून तुरंत बनाएं और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करें।

शिक्षा व्यवस्था लोगो को शिक्षित करके उनको जागरूक करना ताकि वो समाज और धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास से दूर हो सके, जनसंख्या वृद्धि को रोकने तथा परिवार को सीमित करने के संबंध में जनता को शिक्षित करने का कार्यक्रम में तेजी लानी चाहिए।

आर्थिक स्थिति में सुधार लोगों को उचित रोजगार तथा व्यवसाय मिलना चाहिए जिससे आर्थिक स्तर में सुधार हो सके आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने से व्यक्ति अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के बारे में सोच सकता है और अपना परिवार सिमित रखने के लिए प्रेरित हो सकता है।

सीमित परिवार जनसंख्या नियंत्रण में ही जन कल्याण निहित है और था छोटा परिवार ही सुखी परिवार हो सकता है यदि यदि प्रत्येक विवाहित जोड़ा एक दो बच्चे तक परिवारों को सीमित कर ले तो जनसंख्या में प्रभावी कमी हो जाएगी।

स्वास्थ्य एवं यौन शिक्षा बालक बालिकाओं के लिए किशोरावस्था से ही पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य एवं यौन शिक्षा को अनिवार्य कर देना चाहिए जिससे वे अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान दे सकें।

परिवार नियोजन एवं परिवार कल्याण जन कल्याण तथा जनसंख्या दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जनसंख्या वृद्धि को रोकने का सर्वोत्तम एवं सरलतम उपाय परिवार नियोजन है।

Simit Parivar Ke Labh | सीमित परिवार के लाभ

Parivar Niyojan Ke Labh
  • पारिवारिक आय का वितरण प्रत्येक सदस्य पर अधिक होगा।
  • प्रत्येक सदस्य को संतुलित एवं पोषक भोजन उपलब्ध होगा
  • प्रत्येक परिवार हेतु स्वच्छ हवादार प्रकाश युक्त आवास उपलब्ध होगा।
  • माता का स्वास्थ्य उत्तम होगा जिसके कारण वह बच्चों की देखभाल प्रभावी ढंग से कर सकेगी।
  • प्रतिदिन की सभी प्रकार की जरूरतें सरलता से पूरी हो सकेंगी।
  • भविष्य के लिए आवश्यक बचत संभव हो सकेगी।
  • जीवन सुखी और संपन्न होगा प्रत्येक क्षेत्र में सफलता एवं उन्नति के लिए अवसर उपलब्ध होंगे।

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2010 में भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में कौन से स्थान पर था?

2010 की जनसंख्या के अनुसार चीन दुनिया के शीर्ष स्थान पर और भारत दूसरे नंबर पर था।

वर्तमान में विश्व की जनसंख्या कितनी हैं?

वर्तमान समय में विश्व की आबादी लगभग 8 अरब है।

भारत में सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य कौन सा है?

उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है।

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